न्यायाधीश की नियुक्ति में जुड़ा नया विवाद :-
नई दिल्ली : न्यायाधीशों की नियुक्ति को लेकर सरकार और न्यायपालिका के बीच खींचतान चल ही रही थी कि वकील एलसी विक्टोरिया गौरी को मद्रास हाई कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त करने को लेकर एक अन्य नया विवाद भी खड़ा हो गया है।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल हुई है, जिसमें विक्टोरिया गौरी को मद्रास हाई कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त करने का विरोध किया गया है और उन्हें हाई कोर्ट के न्यायाधीश के पद ग्रहण करने की शपथ लेने से रोकने के लिए की मांग उठाई है।
सोमवार को सरकार की ओर से कलेजियम की सिफारिश स्वीकार करते हुए विक्टोरिया गौरी की नियुक्ति की अधिसूचना जारी होने के बाद सुप्रीम कोर्ट के मामले पर तत्काल सुनवाई करने की मांग करी है और कोर्ट के मामले पर मंगलवार को सुनवाई करने को राजी हुए है।
पहले शीर्ष अदालत इस पर शुक्रवार को सुनवाई करने वाली थी। याचिका में विक्टोरिया की पात्रता को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
विक्टोरिया गौरी की नियुक्ति की सिफारिश सुप्रीम कोर्ट कलेजियम से आई थी और सरकार ने उसे मानते हुए नियुक्ति कर दी।
सोमवार को उनकी नियुक्ति की अधिसूचना भी जारी हो गई, बस पद की शपथ लेना और पद ग्रहण करना ही बाकी रह गया है।
ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का याचिका पर विचार के लिए तैयार हो जाना और तत्काल सुनवाई की मंजूरी देना खास हो जाता है।
वैसे 1992 में एक बार ऐसा हो चुका है, जबकि हाई कोर्ट के एक न्यायाधीश की नियुक्ति का आदेश जारी हो गया था और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने शपथ ग्रहण पर रोक लगाई व बाद में नियुक्ति आदेश रद हुआ था।
मद्रास हाई कोर्ट के तीन वरिष्ठ वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका र दाखिल कर विक्टोरिया गौरी को न्यायाधीश नियुक्त करने का विरोध किया है।
याचिका में विक्टोरिया की भाजपा से संबद्धता और पूर्व में कथित तौर पर मुस्लिम व ईसाई समुदाय के खिलाफ दिए गए बयानों को आधार बनाया गया है।
याचिका मद्रास हाई कोर्ट की वरिष्ठ वकील अन्ना मैथ्यू, सुधा रामालिंगम और डी. नागासैला की ओर से दाखिल की गई है।
इस याचिका के अलावा दो और याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हुई हैं, जिनमें वकील विक्टोरिया गौरी को न्यायाधीश नियुक्त करने का विरोध किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने अनुरोध स्वीकार करते हुए मामले को 10 फरवरी कोसुनवाई पर लगाने की मंजूरी दे दी थी, लेकिन दोपहर में भोजनावकाश के बाद राजू रामचंद्रन ने प्रधान न्यायाधीश के समक्ष फिर से मामले म का जिक्र करते हुए केंद्र सरकार की ओर से विक्टोरिया गौरी की नियुक्ति के की अधिसूचना जारी होने की जानकारी दी और कोर्ट से मामले पर तत्काल सुनवाई का आग्रह किया।
पीठ ने इस आग्रह पर कहा कि वह इस मामले में हुए घटनाक्रम पर संज्ञान ले चुकी है, ऐसे में मामले. को सात फरवरी को सुनवाई पर लगाया जाएगा। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि मामले पर सुनवाई के लिए पीठ का गठन किया जाएगा।
विरोध का आधार विक्टोरिया के सार्वजनिक तौर पर आए दो कथित साक्षात्कार हैं, जिनमें उन्होंने मुसलमानों और ईसाइयों के विरुद्ध टिप्पणियां की हैं।
साथ ही उनकी भाजपा से संबद्धता को भी आधार बनाया जा रहा है।
एक अपुष्ट अकाउंट से 2019 में किए गए ट्वीट को आधार बनाकर कहा जा रहा है कि वह भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय महासचिव रही हैं।
अंतरिम आदेश मांगते हुए याचिका में कहा गया है कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर गंभीर खतरे को देखते हुए विक्टोरिया गौरी के हाई कोर्ट जज की शपथ लेने पर अंतरिम रोक लगाई जाए।
मांग के समर्थन में 1992 के कुमार पद्मप्रसाद बनाम भारत सरकार के केस में दिए फैसले का हवाला दिया गया है, जिसमें कोर्ट ने शपथ ग्रहण और पद ग्रहण पर रोक लगा दी थी।
सुप्रीम कोर्ट कलेजियम ने 17 जनवरी को एलसी विक्टोरिया गौरी को मद्रास हाई कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश सरकार को भेजी थी।
साथ ही चार अन्य की नियुक्ति की भी सिफारिश की थी। याचिका में सिर्फ गौरी की नियुक्ति का विरोध किया गया है।
