यूरोप महंगाई से जूझ रहा है। यहां महंगाई की दर पिछले 11 साल के उच्चतम स्तर पर है।
यहां महंगाई की दर रिकॉर्ड 8.9 फीसदी के स्तर पर है। यूरोजोन में शामिल इन देशों के आंकड़ों में 20 देशों में ये हालात हैं।
बाकी देशों में महंगाई की दर और भी ज्यादा है। पूर्वी यूरोप के देश एस्टोनिया में सबसे ज्यादा 23 फीसदी महंगाई दर है।
मिडिल क्लास में सरकारों के प्रति गुस्सा बना हुआ है। कई जगहों पर लोगों ने सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन भी किया है। इससे सरकारें घबराई हुई हैं। ब्रिटेन में प्रधानमंत्री पद के चुनावों में महंगाई सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ साथ ही फ्रांस में भी राष्ट्रपति इमानुअन मैक्रों को भी लोगों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है।
पश्चिमी यूरोप के अपेक्षाकृत धनी देश जैसे जर्मनी, फ्रांस, नीदरलैंड्स, स्पेन और इटली की सरकारों ने महंगाई पर काबू पाने के लिए कई कदम उठाए हैं।
इनमें लोगों को रोजमर्रा की चीजों को कम दामों पर उपलब्ध कराने के लिए स्टोर खोला जाना शामिल है। इन स्टोर्स पर भीड़ देखी जा सकती है।
यूरोप के 58 फीसदी युवाओं में बढ़ रहा असंतोषः यूरोपीय कमीशन
यूरोपीय कमीशन ने अगस्त में जारी अपनी एक रिपोर्ट में कहा कि यूरोप में 30 वर्ष तक की आयु के 58 फीसदी युवाओं बढ़ती महंगाई और रोजगार के अवसरों में कमी के कारण असंतोष बढ़ रहा है।
पूर्वी यूरोप के कम विकसित देशों के साथ-साथ पश्चिमी यूरोप के विकसित देशों में भी युवाओं में गुस्सा है। कोरोना काल के बाद हालात और खराब हो गए हैं।
फ्रांस में यह 87 हजार रुपए हो गई है। पिछले साल की तुलना में इन दोनों देशों में दस गुना से अधिक की वृद्धि हुई है। ब्रिटेन में अक्टूबर से बिजली की दरों में 80 फीसदी बढ़ने की आशंका है।
Anshu kumar
