नेतृत्व विहीन विहीन दिखी किसानों की महापंचायत
नई दिल्ली:- केंद्र सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए संयुक्त किसान मोर्चा (अराजनैतिक) द्वारा जंतर-मंतर पर महापंचायत का आह्वान किया गया था।
महापंचायत में शामिल होने देश के अलग-अलग हिस्सों से किसान जत्थेबंदियों के साथ दिल्ली पहुंचे, लेकिन प्रदर्शनस्थल पर दोपहर बाद तक यह साफ नहीं था कि किसने महापंचायत बुलाई है।
चूंकि संयुक्त किसान मोर्चा ने संदेश जारी कर खुद को महापंचायत से अलग कर लिया था, ऐसे में भारतीय किसान यूनियन एकता सिद्धूपुर (अराजनैतिक) के जगजीत सिंह डल्लेवाल ने बताया कि पंचायत अराजनैतिक किसान संगठनों द्वारा बुलाई गई है।
• सिंघु बार्डर, गाजीपुर गार्डर, नोएडा बार्डर, टीकरी बार्डर पर वाहनों की लगी रहीं लंबी कतारें
• दोपहर से देर शाम तक राजधानी की अंदरूनी सड़कें भी रहीं बेहाल, रेंगते रहे वाहन
किसान सुबह सात बजे से ही धरना स्थल पर पहुंचने लगे थे। देखते-ही-देखते 10 हजार से भी अधिक किसान धरना स्थल पर "पहुंच गए, लेकिन स्पष्ट निर्देश न मिलने पर किसान धरना स्थल से गुरुद्वारा बंगला साहिब की ओर जाते दिखे।
पुलिस ने धरना स्थल पर बैरिकेडिंग कर रखी थी, इसके बावजूद किसान संसद मार्ग और अशोक रोड, यानी दोनों तरफ सड़क पर बैठे थे। शाम चार बजे किसान नेता पुलिस बल के साथ ज्ञापन सौंपने राष्ट्रपति भवन के लिए निकले, जिसके बाद करीब 4:30 बजे किसान नेताओं के
निर्देश पर धरना खत्म हो गया।
किसान नेता शिवकुमार कक्का और इंद्रजीत सिंह पन्नू ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा कानून वापस लेते समय दिए गए आश्वासनों पर अमल न होने के कारण किसान संगठन आंदोलन करने के लिए मजबूर हुए हैं।
हमने आज अपनी बात सरकार के सामने रख दी है। यदि 15 दिन में हमारी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती है तो बड़ा आंदोलन करने लिए मजबूर होंगे।
दिल्ली में होकर भी महापंचायत में नहीं पहुंचे राकेश टिकैत
किसान आंदोलन का बड़ा चेहरा रहे राकेश टिकैत सोमवार को दिल्ली में मौजूद होने के बावजूद किसान महापंचायत में नजर नहीं आए।
वह धरना स्थल से करीब दो किलोमीटर दूर दीनदयाल उपाध्याय मार्ग स्थित गांधी शांति प्रतिष्ठान में आयोजित पुस्तक विमोचन और सेमिनार में शामिल होने पहुंचे थे।
किसान आंदोलन और भविष्य में किसान आंदोलनों की दिशा पर आयोजित सेमिनार के मुख्य अतिथि राकेश टिकैत ने मीडिया के सवालों पर गोल-मोल जवाब दिए।
संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा खुद को महापंचायत से अलग करने के
सवाल पर उन्होंने कहा कि मोर्चे ने खुद को अलग किया होगा। इस समय देश के अलग-अलग स्थानों पर कई आंदोलन चल रहे हैं।
इसका मतलब है कि केंद्र सरकार से असंतुष्ट लोगों की संख्या बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि वह उन सभी प्रदर्शनों, संगठनों और लोगों के साथ हैं, जो किसान हित में काम कर रहे हैं।
इन संगठनों ने किया था समर्थन : किसान महापंचायत का समर्थन करने वाले संगठनों में राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ, भाकियू अंबावता, भाकियू सिरसा, भारतीय किसान एकता, भाकियू खौसा, भारतीय किसान नौजवान यूनियन जैसें कई संगठन शामिल थे।
एक हजार की थी अनुमति, पहुंचे दस हजार किसान
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जासं, नई दिल्ली: अपनी मांगों के समर्थन में सोमवार को जंतर मंतर पर किसान महापंचायत में पहुंचे किसान मोर्चा व अन्य संगठनों ने केंद्र सरकार के • खिलाफ जमकर नारेबाजी की। दो किसान संगठनों ने नई दिल्ली जिला पुलिस से जंतर-मंतर पर महापंचायत की अनुमति मांगी थी।
पुलिस ने दो टुकड़ियों में 500 500 किसानों को जंतर-मंतर पर 'आने की अनुमति दी थीं, लेकिन पुलिस को चकमा देते हुए करीब 10 हजार किसान जंतर-मंतर पर पहुंच गए।
इससे पुलिस की सांसें फूलने लगीं। दिनभर पुलिस इस बात को लेकर आशंकित रही कि कहीं पिछली बार की तरह प्र प्रदर्शनकारी फिर आतंक मचाना न शुरू कर दें।
हालांकि, किसी भी तरह के हालात से निबटने के लिए पुलिस ने सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए थे। महापंचायत के प समय पर और शांतिपूर्वक संपन्न हो जाने पर दिल्ली पुलिस ने भी प राहत की सांस ली।
हालांकि, एक हजार लोगों की अनुमति लेकर 10 हजार लोगों के जंतर मंतर पहुंचने के मामले ने दिल्ली में पुलिस के खुफिया विभाग की अ विफलता को फिर उजागर कर दिया है
किसानों की महापंचायत के कारण जाम में फंसी दिल्ली
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