एमआरपी बदल सेना को ऊंचे दामों पर होती थी सप्लाई, चलता था रिश्वत का खेल
सेना में सप्लाई होने वाले इलेक्ट्रिक आइटम के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) की राशि बदलकर रिश्वत के खेल का भंडाफोड़ होने के बाद इसकी आंच इलेक्ट्रिक आइटम बनाने वाली कंपनी पर भी हो आ सकती है, जो उत्तर प्रदेश की दे है। माल ऊंचे दाम पर खरीदा जाता, अ था और इसके एवज में 45 से 55 कं प्रतिशत की रिश्वत ली जाती थी ।
सीबीआइ द्वारा गिरफ्तार किए से गए वरिष्ठ बैरक स्टोर अधिकारी त लेफ्टिनेंट कर्नल राहुल पंवार, हिं सूबेदार मेजर प्रदीप कुमार, सप्लायर दिनेश कुमार व सप्लायर प्रीतपाल से 3 पूछताछ में कई रहस्य उजागर हुए हैं। गवर्नमेंट ई मार्केट पैलेस (जैम) है पर किस तरह से खेल किया जाता थ था, इसको लेकर भी सीबीआइ वे पूछताछ कर रही है।
मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विस (एमईएस) के जरिये जो आइटम सेना में सप्लाई म करनी होती थी, उसका एमआरपी में कई गुणा बढ़ा दिया जाता था। क एलईडी आइटम दिखाए अधिक वाट दि के जाते थे, लेकिन सप्लाई कम वाट वाली की जाती थी। जब यह तय कहो जाता था कि इसी कंपनी को टेंडर देना है, तो पोर्टल पर उसको टेंडर आवंटित कर दिया जाता।
अन्य कंपनियों को रिजेक्ट कर दिया जाता था। पेमेंट होने के बाद उसकी 45 से 55 प्रतिशत राशि नीचे से ऊपर तक अधिकारियों के पास उनके तय हिस्से के अनुसार पहुंचा दी जाती धी। एमआरपी कंपनी से बदलकर आता था या फिर सप्लायर बदल देते थे, इसको लेकर पूछताछ जारी जारी है
यदि कंपनी से यह खेल चल रहा था, तो सीबीआइ की जांच में कंपनी के एमडी और अन्य की गिरफ्तारी होना तय है। लखनऊ में रिश्वत के रुपये देने से मना किया: उत्तर प्रदेश के लखनऊ में पांच लाख रुपये रिश्वत लेने की डील हुई थी।
लेकिन सप्लायर दिनेश कुमार ने यह राशि लखनऊ में देने से इन्कार कर दिया। सप्लायर का कहना था कि वह लखनूमें रकम का बंदोवस्त नहीं कर सकेगा। उस समय प्रदीप कुमार अवकाश पर लखनऊ गए थे। लखनऊ में ही उसने दिनेश को पांच न लाख रुपये देने की बात कही थी। छुट्टी से लौटने के बाद अंबाला में - डील फाइनल हो गई। इसके बाद सीबीआइ ने अपना जाल बिछाकर इन सभी को गिरफ्तार कर लिया। एफआइआर में कर्तत का नाम नहीं ता पूछताछ के बाद छोड़ा: सीबीआई 15 की एफआइआर में चार लोगों को पर नामजद किया गया है।
इन में बैरेक तप स्टोर अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल ती राहुल पंवार, सूबेदार मेजर प्रदीप कर कुमार, दिनेश कुमार व सप्लायर प्रीतपाल शामिल हैं, लेकिन कर्मल वसीम सिद्दीकी का नाम नहीं है। पीते सोमवार को कर्नल वी सिटी के सरकारी आवास पर भी सर्च अभियान चलाया और पूछताछ के लिए सीबीआई उसे अपने साथ से ले गई। उन्हें पूछताछ के बाद छोड़ ऊ दिया गया।
मंगलवार को भी वसीम जिने से पूछताछ की गई है और सीबीआई यर कमांडर वक्स इंजीनियर अंबाला का रिकार्ड खंगाल रही है। इस रिश्वतकांड की जांच इस कार्यालय तक पहुंच चुकी है।
