दो सितंबर को नौसेना में शामिल होगा 'विक्रांत', 2300 से अधिक कंपार्टमेंट वाले इस पोत में कुल 14 डेक
30 विमान और हेलीकाप्टर भर सकते हैं इससे उड़ान
इस स्वदेशी विमान वाहक से 30 विमान और हेलीकाप्टर उड़ान भर सकते हैं। यह पोत स्वदेश निर्मित उन्नत हल्के हेलीकाप्टरों (एएलएच) और हल्के लड़ाकू विमानों के अलावा लड़ाकू जेट मिग-29, कामोव-31, मल्टी रोल हेलीकाप्टर एमएच-60 आर से युक्त एक एयर विंग का संचालन करने में सक्षम है। 2300 से अधिक कंपार्टमेंट वाले इस पोत में 14 डेक हैं। 1700 कर्मी इस पर एक साथ ठहर सकते हैं। इस पोत की अधिकतम गति 28 समुद्री मील प्रति घंटा है।
युद्धपोत में एक अस्पताल परिसर भी है।
कोच्चि, पेट्र:-
हिंद महासागर में भारत की ताकत और बढ़ने वाली है। दरअसल देश का पहला स्वदेशी विमान वाहक पोत (एयरक्राफ्ट कैरियर) आइएसी 'विक्रांत' दो सितंबर को नौसेना में शामिल होगा। भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है जिनके पास स्वदेशी विमान वाहक पोत के निर्माण की क्षमता है।
भारत के अलावा इन देशों में अमेरिका, चीन, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और इटली शामिल हैं।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल) के अंदर विशेष स्थान पर आयोजित कार्यक्रम में इस पोत को नौसेना में शामिल करेंगे। इसका निर्माण ने किया है। इसके निर्माण में 20,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आई है।
समुद्री परीक्षण के चौथे और अंतिम चरण को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद 28 जुलाई को सीएसएल ने कोच्चि में इसे नौसेना के हवाले किया था। यह पोत आत्मनिर्भर भारत का एक आदर्श उदाहरण है।
इस विमान वाहक पोत के शामिल होने से हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की स्थिति और मजबूत होगी।
इसका नाम भारत के पहले विमान वाहक विक्रांत के नाम पर रखा गया है। उसने 1971 के युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
262 मीटर लंबे इस विमान वाहक की कुल क्षमता लगभग 45,000 टन है।
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